परिचय
हिन्दू धर्म में वर्ष के बारह महीनों में सावन (श्रावण मास) का विशेष महत्व होता है। यह महीना आस्था, भक्ति और आध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। विशेषकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए यह मास अत्यंत शुभ होता है। सावन का महीना प्रकृति की हरियाली, वर्षा और धार्मिक अनुष्ठानों से भरा होता है, जो श्रद्धालुओं के मन को शांति और भक्ति से भर देता है। कहते है भगवान शिव को सावन का महीना अतिप्रिय है।
सावन का धार्मिक महत्व:
सावन मास का सीधा संबंध भगवान शिव से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी मास में समुद्र मंथन हुआ था और हलाहल विष निकला था जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। उस विष की तपन को शांत करने के लिए भगवान शिव पर जल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई। इसीलिए सावन के महीने में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाना विशेष फलदायक माना जाता है।
श्रावण सोमवार का महत्व:
सावन मास में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व है। इसे श्रावण सोमवार व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और शिव की उपासना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कुंवारी कन्याएं इस व्रत को अच्छे वर की प्राप्ति के लिए करती हैं। इस व्रत को पुरुष भी करते है। इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।
भक्ति और तप का महीना:
सावन का महीना तप, त्याग और संयम का प्रतीक माना गया है। भक्त इस महीने मांस, शराब और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं। शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर जाते हैं और गंगा जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। ये सब आचरण मानसिक और शारीरिक शुद्धता को बढ़ाते हैं। भगवान शिव को दूध, दही चढ़ाया जाता है इसलिए इस महीने में दूध, दही और इनसे बनी चीजों को खाना – पीना निषेध मानते है।
प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी विशेष:
सावन का महीना वर्षा ऋतु का समय होता है, जब धरती हरी-भरी हो जाती है। खेतों में हरियाली और नदियों में जल का प्रवाह वातावरण को पवित्र और शांतिपूर्ण बनाता है। यह ऋतु आत्मचिंतन और साधना के लिए उत्तम मानी जाती है।
महिलाओं के लिए विशेष पर्व:
सावन में हरियाली तीज, रक्षा बंधन, नाग पंचमी जैसे पर्व आते हैं जो विशेषकर महिलाओं के लिए आनंद, प्रेम और सौंदर्य से जुड़े होते हैं। इस महीने में सुहागन महिलाएं मेहंदी लगाती हैं, झूले झूलती हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत करती हैं।
निष्कर्ष:
हिन्दू धर्म में सावन का महीना केवल एक मौसम नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक जागृति, शिवभक्ति, और मानसिक शुद्धि का अवसर है। यह मास जीवन में संयम, भक्ति और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को जागृत करता है। सावन का पावन महीना न केवल भगवान शिव की कृपा पाने का माध्यम है, बल्कि यह जीवन में शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता भर देता है। इसलिए सावन का महीना हिन्दुओं के लिए विशेष होता है।