वेद और पुराण क्या है? वेद और पुराण में अंतर

वेद और पुराण की भूमिका

भारतीय धर्म, दर्शन और संस्कृति की नींव जिन ग्रंथों पर टिकी है, उनमें वेद और पुराण का विशेष स्थान है। ये न केवल आध्यात्मिक ज्ञान के भंडार हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता के इतिहास, विज्ञान, समाज और जीवनशैली का प्रतिबिंब भी हैं।

वेद क्या है?

परिभाषा

“वेद” शब्द संस्कृत के “विद्” धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है — जानना या ज्ञान। वेदों को “श्रुति” कहा जाता है, यानी जो सुना गया — यह ईश्वर द्वारा ऋषियों को श्रवण के माध्यम से दिया गया ज्ञान है।

वेदो की संख्या

वेद कुल चार हैं:

  1. ऋग्वेद – यह सबसे प्राचीन वेद है। इसमें 1028 ऋचाएँ (मंत्र) हैं जो देवताओं की स्तुति के लिए हैं।
  2. यजुर्वेद – यह यज्ञों के नियम और विधियों का संग्रह है।
  3. सामवेद – इसमें संगीतबद्ध मंत्र हैं जिन्हें गाकर यज्ञ में उपयोग किया जाता था।
  4. अथर्ववेद – इसमें आयुर्वेद, तंत्र, मंत्र, रोग निवारण, गृहस्थ जीवन आदि विषय शामिल है।

वेद की विशेषताएं

वेद किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं रचे गए; इन्हें ऋषियों ने ध्यान में प्राप्त किया।ये ज्ञान के शुद्धतम स्रोत माने जाते हैं।वेदों में धर्म, कर्म, सत्य, ब्रह्म, आत्मा, यज्ञ, प्रकृति आदि विषयों पर गहन चर्चा होती है।

पुराण क्या है?

परिभाषा

“पुराण” शब्द दो भागों से बना है: “पुरा” (प्राचीन) और “ण” (नवीन)। यानी – जो प्राचीन भी हो और समयानुसार नवीन ज्ञान भी दे।पुराणों को “स्मृति” ग्रंथ कहा जाता है — यानी मन में रखा गया और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाया गया ज्ञान।

पुराणों की संख्या:

ऋषि व्यास द्वारा रचित 18 मुख्य पुराण माने जाते हैं:

  1. ब्रह्म पुराण
  2. पद्म पुराण
  3. विष्णु पुराण
  4. शिव पुराण
  5. भागवत पुराण
  6. नारद पुराण
  7. मार्कण्डेय पुराण
  8. अग्नि पुराण
  9. भविष्य पुराण
  10. ब्रह्मवैवर्त पुराण
  11. लिंग पुराण
  12. वाराह पुराण
  13. स्कंद पुराण
  14. वामन पुराण
  15. कूर्म पुराण
  16. मत्स्य पुराण
  17. गरुड़ पुराण
  18. ब्रह्मांड पुराण

विषय-वस्तु:- सृष्टि की उत्पत्ति और विनाश की कथाएँदेवताओं और असुरों की लीलाएँधर्म और अधर्म का संघर्षतीर्थ, व्रत, पूजा विधिमनुष्यों के चार आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास)संस्कार, नीति, आदर्श जीवन

वेद और पुराण में अंतर:

उत्पत्ति :- वेद की उत्पत्ति अपौरुषेय (ईश्वर प्रदत्त) द्वारा हुई है और पुराण व्यास मुनि द्वारा रचित है।
श्रेणी :- वेद श्रुति श्रेणी में आता है।, और पुराण स्मृति श्रेणी में आता है।
विषय :- वेद आध्यात्मिक ज्ञान, यज्ञ, ब्रह्मविद्या का विषय है।, और पुराण कथाएँ, इतिहास, नीति, भक्ति का विषय है।
भाषा :- वेद में प्राचीन संस्कृत भाषा है।, और पुराण में सरल संस्कृत / गद्य व पद्य मिश्रित भाषा है।
संख्या:- 4 मुख्य वेद है।, और 18 मुख्य पुराण है।

निष्कर्ष:

वेद भारतीय ज्ञान का मूल स्रोत हैं — ये ब्रह्मांड, आत्मा और धर्म का सिद्धांत बताते हैं। वहीं पुराण आम जनता के लिए उस ज्ञान को कथाओं और उदाहरणों के रूप में सरलता से प्रस्तुत करते हैं।
दोनों ही ग्रंथ मिलकर भारतीय संस्कृति की गहराई और विशालता को दर्शाते हैं।

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