माँ शैलपुत्री की कथा | नवरात्रि के पहले दिन पूजा का महत्व और पूजन विधि

परिचय

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह त्योहार साल में दो बार आता है – चैत्र और शारदीय नवरात्रि। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की उपासना की जाती है। शैलपुत्री यानी पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी। यह कथा सिर्फ पौराणिक ही नहीं बल्कि जीवन को स्थिरता और शक्ति देने वाली भी है।

माँ शैलपुत्री की जन्म कथा

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माँ शैलपुत्री का पहला जन्म प्रजापति दक्ष के घर सती के रूप में हुआ था।

  • सती ने भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार किया था।
  • लेकिन एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बड़ा यज्ञ किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया, पर भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया।
  • सती बिना बुलावे के यज्ञ में पहुंचीं। वहाँ उन्होंने अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान सुना।
  • पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ अग्नि में कूदकर अपना जीवन त्याग दिया।

सती ने शरीर त्यागने के बाद हिमालयराज के घर पुत्री रूप में जन्म लिया और इस प्रकार वे माँ शैलपुत्री कहलाईं।

माँ शैलपुत्री का स्वरूप

माँ शैलपुत्री का दिव्य रूप अत्यंत मनोहर और शांत है।

  • वे नंदी बैल पर सवार होती हैं।
  • उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है।
  • उनके मस्तक पर अर्धचंद्र शोभायमान होता है।
  • उनका रूप भक्तों को स्थिरता, साहस और शांति प्रदान करता है।

माँ शैलपुत्री का महत्व

  1. माँ शैलपुत्री कुण्डलिनी शक्ति का प्रथम स्वरूप मानी जाती हैं। साधक अपनी साधना की शुरुआत इन्हीं से करता है।
  2. इनकी पूजा से मनुष्य को धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।
  3. परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
  4. नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
  5. माँ शैलपुत्री को चंद्रमा और पृथ्वी की देवी भी माना जाता है, इसलिए उनकी कृपा से जीवन में स्थिरता आती है।

माँ शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा सबसे पहले की जाती है।

  1. प्रातः स्नान कर घर को पवित्र करें।
  2. घर में कलश स्थापना करें और माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. उनके सामने दीपक जलाएं और धूप, फूल, चंदन अर्पित करें।
  4. माँ को विशेष रूप से सफेद पुष्प और दूध से बने व्यंजन अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  5. अंत में उनका मंत्र जप करें:

मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।

माँ शैलपुत्री की आराधना से लाभ

  • घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • मानसिक तनाव दूर होता है और आत्मबल बढ़ता है।
  • वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याएँ समाप्त होती हैं।
  • विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलती है।
  • जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शांति प्राप्त होती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करने से साधक की साधना सफल होती है और जीवन में स्थिरता आती है। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति का प्रथम स्वरूप हैं। उनकी उपासना से न सिर्फ आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि सांसारिक जीवन भी सुखमय बनता है।

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