माँ: त्याग, प्रेम और समर्पण की मूर्त रूप

प्रस्तावना

माँ एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरी सृष्टि का सार समाया है। जब दुनिया में कोई साथ नहीं देता, तब एक माँ ही होती है जो अपने बच्चे के लिए आखिरी दम तक खड़ी रहती है। माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, वह जीवन जीने की प्रेरणा, संघर्ष करने की शक्ति और ममता की अमर नदी होती है। माँ अपने बच्चों की रक्षा के लिए किसी से भी लड़ जाती है। पुत्र हो या पुत्री माँ के लिए सब बराबर होते है।

माँ का महत्व

माँ का स्थान संसार में सबसे ऊँचा है। कहा भी गया है —”जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”अर्थात जननी (माँ) और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ होती है। माँ न केवल शरीर को जन्म देती है, बल्कि संस्कारों, मूल्यों और आत्मबल का भी बीजारोपण करती है। इसलिए प्रथम गुरु माँ होती है। माँ हमें इस संसार में लाती है और जीवन की प्रथम दिशा भी वही दिखाती है।

माँ का त्याग

एक माँ अपने बच्चों की खुशी के लिए हर दर्द, हर तकलीफ को सह लेती है।

नौ महीना पेट में रखकर हर तकलीफ झेलकर अपने बच्चे को इस दुनिया में लाती है।

वह अपने हिस्से की रोटी बच्चों को खिला देती है।

बच्चों को चैन की नींद सुलाने के लिए खुद रात भर जाग लेती है।

अपने सपनों को छोड़कर बच्चों के सपनों को पालती है।

बीमारी में भी बच्चों की देखभाल करना नहीं भूलती।

अपने बच्चों के लिए अपनों से भी झगड़ लेती है।

माँ का प्रेम

माँ का प्यार निःस्वार्थ होता है। वो प्यार जो न किसी शर्त पर आधारित होता है और न ही किसी बदले की अपेक्षा रखता है। उसका आशीर्वाद हमेशा अपने बच्चों के साथ होता है, चाहे वह कितनी भी दूर क्यों न चले जाएं। बच्चा कितना भी बुरा क्यों ना हो पर माँ कभी भी अपने बच्चों के बारे में बुरा नहीं सोचती।

माँ की उपेक्षा ना करें

आधुनिक जीवन में कई बार हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि माँ के साथ बैठकर दो बातें करना भी भूल जाते हैं। लेकिन ये याद रखना चाहिए —
“जिस दिन माँ की दुआएं साथ नहीं होंगी, उस दिन दुनिया बहुत सूनी लगने लगेगी।”

कुछ लोग तो ऐसे भी है जो अपनी माँ के बूढ़े होने उन्हें बोझ समझ कर वृद्धाआश्रम छोड़ आते है। तब उन्हें ये याद नहीं आता की माँ ने हमारे लिए क्या क्या त्याग किया था। जिस माँ ने पहले खुद का पेट ना भरकर अपने बच्चों को दूध पिलाया, उसी माँ की सेवा के लिए लोगो के पास पैसे नहीं होते है। अपनी माँ की सेवा करे, उन्हें बोझ ना समझें।

निष्कर्ष

माँ केवल शब्द नहीं, एक संपूर्ण अनुभव है। वह शक्ति है, सृष्टि है, और सबसे बड़ा सहारा भी। जीवन में कोई साथ दे या ना दे पर माँ अपने बच्चों के साथ हमेशा खड़ी रहती है इसलिए आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि अपनी माँ की सेवा करेंगे, उनका आदर करेंगे और उन्हें वो स्नेह देंगे जिसकी वे सच्ची हकदार हैं।

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