कोई अपने घर में मरते हैं कोई भागते हुए अपने प्राण त्याग करते हैं, कुछ लोग अन्न खाकर और पानी पीकर काल की गोद में चले जाते हैं। इसी प्रकार कुछ लोग ऐसे हैं जो भोग विलास का आनंद ले रहे हैं, इच्छा अनुसार वाहनों पर घूमते हैं, जो शरीर से निरोग हैं तथा कभी किसी भी प्रकार का शस्त्र से उनके शरीर कभी घायल नहीं हुआ, वे भी यमराज के वश में हो जाते हैं। कुछ लोग निरंतर तपस्या में लगे रहते हैं फिर भी उन्हें यमराज के दूत उठाकर ले जाते हैं। लगातार योगाभ्यास करने वाले लोग भी शरीर से अमर ना हो सके।
कैसे आयु शेष रहने पर पक्षी के अंडे फूटने से बचे
महाभारत के युद्ध में अर्जुन और भगदत्त के बीच युद्ध हो रहा था। सारा आकाश टिड्डियों के भाती वाणो से खचाखच भर गया था। अर्जुन की धनुष से छूटा हुआ वाण बड़े वेग से एक पक्षी के समीप आया और उसके पेट में घुस गया। पेट फट जाने से चंद्रमा के समान श्वेत रंग वाले चार अंडे पृथ्वी पर गिर गए। किंतु उनकी आयु शेष थी, अतः वे फुट ना सके, बल्कि पृथ्वी पर ऐसे गिरे मानो रुई की ढेर पर गिरे हो। उन अंडों के गिरते ही भगदत्त के सुप्रतीक नामक गजराज की पीठ से एक बहुत बड़ा घंटा भी टूट कर गिर पड़ा, जिसका बंधन वाणों के आघात से कट गया था। यद्यपि वह अंडों के साथ ही गिरा था तथापि उन्हें चारों ओर से ढकता हुआ गिरा, और धरती में थोड़ा-थोड़ा धस भी गया।

युद्ध समाप्त होने पर जहां घंटे के नीचे अंडे पड़े थे, उस स्थान पर शमीक नाम के संन्यासी महात्मा गये। उन्होंने वहां चिड़ियों के बच्चों की आवाज सुनी। यद्यपि उन सबको परम विज्ञान प्राप्त था, तथापि निरे बच्चे होने के कारण वह अभी स्पष्ट वाक्य नहीं बोल सकते थे। उन बच्चों की आवाज से शिष्यों सहित महर्षि शमीक को बड़ा विस्मय हुआ और उन्होंने घंटों को उखाड़ कर उसके भीतर पड़े हुए उन माता-पिता और पंख से रहित पक्षी शावकों को देखा। उन्हें इस प्रकार भूमि में पड़ा देख महा मुनि शमीक आश्चर्य में डूब गए और अपने साथ आये हुए शिष्यों से बोले, विधाताकी इच्छा अनुसार जब तक जीव की आयु पूर्ण नही हो जाती तब तक उसे कोई मार नहीं सकता।