एक बार हरि बोल बोलने से क्या फल मिलता है?

एक बार मरने के बाद एक आदमी यमलोक पंहुचा। वहां उसे यमराज के सामने ले जाया गया। यमराज ने उस आदमी से कहा तुमने जीवन भर बहुत पाप किए हो, एक भी अच्छा काम नहीं किया इसलिए तुम्हें नरक लाया गया है। तभी आदमी बोला कि मैं मानता हूं मैंने जीवन भर बहुत पाप किए हैं लेकिन मैंने अपने जीवन में एक बार हरि बोल बोला है पहले मुझे उसका फल दीजिए, फिर मेरे पाप का फल दीजिएगा। यमराज ने कहा, क्या तुमने पूरे जीवन भर एक बार ही हरि बोल बोला है। उस आदमी ने कहा, हां, पहले मुझे उसका फल दीजिए। यमराज ने कहा, एक बार हरि बोल का फल तो हमें नहीं पता। तो वह व्यक्ति बोला मुझे नहीं पता, पहले आप मुझे एक बार हरि बोल का फल दीजिये तभी मैं नरक की यातना सहूंगा। यमराज जी उस व्यक्ति को लेकर शंकर जी के पास गए। शंकर जी से जाकर पूछा कि भगवान इसने एक बार हरि बोल बोला है इसका इसे क्या फल मिलेगा। शंकर जी ने कहा, सवा लाख का फल मुझे पता है एक करोड़ का फल मुझे पता है और प्रतिदिन बोला गया हरि बोल का फल भी मुझे पता है, लेकिन एक बार हरि बोल का फल मुझे नहीं पता। तब वह व्यक्ति बोला कि मुझे नहीं पता आप दोनों मुझे पहले एक बार हरि बोल का फल दीजिए तब मैं नरक की यात्रा करूंगा। अब यमराज जी और शंकर जी उसे व्यक्ति को लेकर ब्रह्मा जी के पास गए और ब्रह्मा जी को सारी बात बताई। ब्रह्मा जी ने भी कहा मुझे भी एक बार हरि बोल का फल नहीं पता, लेकिन हां इसका फल नारद जी को जरूर पता होगा क्योंकि वह प्रतिक्षण हरि बोल बोलते हैं।

अब यमराज जी ब्रह्मा जी और शंकर जी उस व्यक्ति को लेकर नारद जी के पास पहुंचे और नारद जी से कहा, नारद जी आप प्रतिक्षण हरि बोल बोलते हैं तो आप एक बार हरि बोल का फल बता दीजिए। नारद जी ने कहा एक बार हरि बोल का फल तो मुझे भी नहीं पता मैं प्रतिक्षण हरि बोल बोलता हूं लेकिन एक बार हरि बोल का फल क्या होता है यह तो मुझे भी ज्ञात नहीं है, लेकिन एक बार हरि बोल का फल मेरे प्रभु श्री हरि को जरूर पता होगा तो हमें उन्हीं के पास चलना चाहिए। अब यमराज जी शंकर जी ब्रह्मा जी और नारद जी उस व्यक्ति को लेकर बैकुंठ धाम श्री हरि जी के पास पहुंचे। वहां जाकर श्री हरि को सारी बात बताइए और उनसे पूछा कि एक बार हरि बोल का फल बताइए। तब श्री हरि ने कहा, अब और फल जानने की जरूरत ही क्या है, जब स्वयं ब्रह्मा जी शंकर जी नारद जी और यमराज जी जिसको लेकर बैकुंठ लेकर आवे, समझो वही एक बार हरि बोल बोलने का फल है।

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